Lac- scientific farming

Lac- scientific farming

A blog post by @proanuppur

सफलता की कहानी लाख की खेती से हो रहा है आजीविका संवर्धन परंपरागत स्त्रोत से मिला आय का साधन

अनूपपुर 21 मार्च 2018/ प्राचीन महाभारत काल के लाक्षागृह का नाम सुनते ही सब को लाख (लाह) का स्मरण हो आता है। लाख एक अत्यंत ज्वलनशील प्राकृतिक राल है, जिसका उपयोग सौन्दर्य, प्रसाधन, औषधि के रंग तथा अन्य कई क्षेत्रों मे उपयोग होता है, कह सकते है कि लाख के लाख उपयोग है। अनूपपुर क्षेत्र मे प्राकृतिक रूप से लाख कीट के पोषक वृक्ष – पलास, कोसम तथा बेर बहुतायत मे विद्यमान हैं। प्राचीन समय मे लाख से प्राप्त राजस्व राशि रीवा रियासत के राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था। समय एवं मौसम चक्र मे परिवर्तन से क्षेत्र मे लाख की खेती लुप्त हो गयी थी। ऐसे मे लाख की खेती को पुनर्जीवित करने मे म॰प्र॰ ग्रामीण आजीविका परियोजना एवं हार्ड संस्था ( होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एंड डेवलोपमेंट) द्वारा अनूपपुर ज़िले के चुकान गाँव मे सर्वप्रथम 2004-05 मे 25-30 हितग्राहियों को साथ मे लेकर रंगीनी लाख की कृषि प्रारम्भ की गयी थी। समय के साथ ग्रामवासियों की लगन को संस्थान एवं शासन के अतिरिक्त उद्योगीनी नई दिल्ली एवं राल अनुसंधान केंद्र रांची का तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ।

वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल कर बढ़ाया उत्पादन

रांची राल अनुसंधान केंद्र ने यहाँ के हितग्राहियों को लाख की खेती के गुर सिखाये।हार्ड संस्था के सचिव सुशील शर्मा बताते हैं प्रशिक्षण के अंतर्गत लाभान्वितों को पेड़ो का चयन, पेड़ो की मर्किंग, ब्रूड संचरण, दवा का छिड़काव , लाख की कटाई एवं लाख संग्रहण के गुर सिखाये गए। लाख की खेती से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए पोषक वृक्षो पलास रंगीनी लाख के लिए कोषम एवं बेर कुसुमी लाख के लिए चयनित करने चाहिए इससे लाख के कीट को भरपूर पोषण मिलता है। पोषक वृक्ष मे ब्रूड संचरण के 21 दिन के बाद ब्रूड उतारने की प्रक्रिया को फूंकी उतरना कहते हैं। ऐसा न करने से शत्रु कीट उत्पन्न होता है जो लाख की फसल को नष्ट कर देता है। मौसम चक्र मे परिवर्तन के अनुसार दो बार दवा का छिड़काव और लाख की फसल तैयार हो जाती है।

7 से 8 हजार तक की हो रही है अतिरिक्त आमदनी

आज अनूपपुर ज़िले मे 1000 से अधिक महिलाएं लाख की खेती से जुड़ चुकी हैं। लाख की खेती कम आय वाले परिवारों के लिए भी उपयुक्त है क्योकि इसमे उन्हे एक सीजन मे 10-15 दिन ही कार्य करना पड़ता है लागत भी एक वर्ष बाद नगण्य हो जाती है। एक सीजन मे 10-15 वृक्षों मे यदि लाख का संचरण किया जाए तो हितग्राही को लगभग 10-15 हजार की आमदनी हो जाती है। अनूपपुर मे औसतन एक व्यक्ति को लाख की खेती से कृषि आय एवं अन्य साधनो के अतिरिक्त 7 से 8 हजार की आय हो जाती है। परंपरागत कृषि एवं वैज्ञानिक पद्धति के उन्नत मिश्रण से अनूपपुर ज़िले के जैतहरी एवं कोतमा विकासखंड के 1000 से अधिक व्यक्तियों को मिल रही है अतिरिक्त आमदनी।

Comment (1)

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    mbourtv     April 4, 2018 at 2:44am

    Thank you so much! And I hope they help (:cialis

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